**भगवान श्री कृष्ण की स्तुति**
**पद (1):**> श्री कृष्ण गोपाला, गोपी-मन हारिणी,> बसुधाका तिलक, बृज के सुन्दर नंदलाला।> वृंदावन के बनकुल, मुरली वाले, गोपियों के राजा,> सबके दुख हर्ता, हे माखन खाने वाले॥**चरण (2):**> यशोदा के लाडले, भाव से उदारा,> राधा के संगी, गोपियों के उद्धारकारी।> दिख रहे जहाँ, रह रहे भक्तों के हृदय में,> कृपा से सराबो, हमें भी पाने दो धाम तुम्हारे आने वाले॥**अर्थ/सार:**- इस भजन में श्री कृष्ण की दिव्य छवि, गोपियों के साथ प्रेम और भक्तों के प्रति कृपा का वर्णन है।- भक्तिभाव, सरलता और वृंदावन के सौंदर्य को दर्शाया गया है.**सुझाव:**- यह भजन सुबह के समय या भक्ति सभा में गुनगुनाया जा सकता है।- मुरली धुन के साथ पाठ करें तो भाव और गहरा रहेगा।यदि आपको किसी विशेष देवता, गीत या विषय (जैसे शिव, दुर्गा, रमण आदि) के लिए भजन चाहिए, तो कृपया बताएं! 🙏---
*स्रोत: मूल रचना | भक्ति साहित्य के प्रति सम्मान* 🌸
