🕉️ महामृत्युंजय मंत्र (संस्कृत)
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे
सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
📖 अर्थ (सरल हिंदी में):
हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की आराधना करते हैं,
जो सुगंधित हैं और सभी को पोषण देते हैं।
जैसे पका हुआ फल बेल से स्वतः अलग हो जाता है,
वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त कर
अमरता (आध्यात्मिक शांति) की ओर ले जाएँ।
⏱️ जप करने का सही समय:
सुबह ब्रह्ममुहूर्त या शाम
11, 21 या 108 बार जप